Sikhi Image from:pexels.com एक कौम होई ऐ सिखी.. जिहन्ना नु आजादी ना दिठी .. सबने ऐश कौम नु सत्ताऱ्या ऐ.. अपना गुलाम बनाया ऐ.. जद कदी वी सिखी दे.. हक दी आवाज उठाई ऐ.. बदले विच सूली पाई ऐ.. वाहे गुरु जी तुहडा की भांडा ऐ .. क्यों सिख हो के.. सिर्फ मर जाणा ऐ.. हर कोई सिख तौ .. कुर्बानी मंगे.. ज़द वी हक दी गल आवे.. सूली ते टंगे.. गुरु जी दे लाल.. कंदा विच चिडाये .. सिख योद्धे.. चर्खडिया ते चडाये .. क्यों सिखी च सिर्फ.. मरना लिखया ऐ.. भांवे भगत सिंह, उधम सिंह हो.. अते शहीद सराभा.. मर गये ये सिख बोल के.. जय भारत माता.. बदले विच सिखां नु.. पहला 47 च फ़िर .. 84 च चुन चुन कतळ किता.. देश दा बटवारा.. सिखां दी लासाँ ते किता.. देश कि .. यह पंजाब दा बटवारा सी.. सिखां की पाया.. सारा कुछ गवाया .. सिखां दे होम लैंड पंजाब नु.. चार टुकड़ियां विच वड दिता .. सिखां दा स्वाभिमान.. खंड खण्ड किता.. सिख भारत विच.. दूजे दर्जे दे नागरिक हो रह गये.. सारा सिखा दा मान सम्मान.. बेज्जती विच बह गया.. सिख देश च.. चुटकला बन रह गया.. दशमेश पित...