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आपको चाहने वाला सारा जहाँ निकला

मैंने सोचा आपको चाहने वाला सिर्फ मैं हूं, आपको चाहने वाला सारा जहाँ निकला, सोचा खुदा से इसकी शिकायत करूँ, पर वो भी आपको चाहने वाला निकला !

आग उगलते हैं तेरे शहर के लोग

कैसे आऊं तेरे शहर की ओर, आग उगलते हैं तेरे शहर के लोग, मैं तो टूटा एक साक का पत्ता हूँ, फूल तक कुचलते हैं तेरे घर के लोग.

हमरा चेहरा याद आयेगा

अंदाज़ निगाहों के जुबां पे आयेगा, उस दिन तुम्हे चेहरा हमरा याद आयेगा पछताओगे तुम उस दिन, जिस दिन ये हमसफ़र जहाँ से चला जायेगा!!