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पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला।

सहती रहो  माँ ने कहा था। सहती जाओगी तो धरती कहलाओगी दादी ने कहा। फिर वो भी  कभी बही सरिता बन कभी पहाड़ हो गई  कभी किसी अंकुर की माँ हो गई पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला। एक स्त्री से अन्य तक  पहुँची यही बात सब अपनी-अपनी जगह  होती चली गई जड़वत् बनती चली गई धरती जैसी। हर धरती के आसपास रहा कोई चाँद तपिश भी देता रहा कोई सूरज तब से पूरा का पूरा सौर मंडल साथ लिए घूमने लगी है स्त्री ।

बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.

बुरा समय बीत जाता है लेकिन, बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.  इसलिए हमें खुद को इतना सक्षम बनाना चाहिए कि बुरे वक्त में भी किसी बुरे व्यक्ति की मदद न लेनी पड़े. कर्ण ने बुरे समय में दुर्योधन की सहायता ली थी,  इसलिए वह दुर्योधन का ऋणी बन गया. दोस्ती की भी एक मर्यादा होती है और हमें उस मर्यादा को कभी नहीं टूटने देना चाहिए.  क्योंकि मर्यादा टूटने के बाद दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है. अगर आपके पास एक भी सच्चा दोस्त है,  तो मुश्किलों का सामना   आप आत्मविश्वास से करेंगे. दोस्ती अपने उम्र वाले लोगों से हीं निभती है,  बेमेल दोस्ती अतं में एक बुरी याद बन जाती है. एक सच्चा दोस्त, सभी रिश्तेदारों पर भारी होता है. बचपन की दोस्ती सबसे ज्यादा टिकती है. किसी से दोस्ती करते वक्त चौकन्ने रहिए,  क्योंकि कुछ लोग दोस्त बनकर पीठ में छूरा भोंकते हैं. सफल वैवाहिक जीवन जीने वाले लोग आपस में बहुत अच्छे दोस्त होते हैं. कई बार हमारे दुश्मन, हमें कुछ कर गुजरने के लिए मजबूर करते हैं. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा दोस्त होते हैं,  उनके पास कोई सच्चा दोस...

गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना,

गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना,  Q कि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं

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