सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

त्योहारों लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कांवरियों

9 अगस्त को तकरीबन 5 बजे देवघर के बेलाबगान इलाके के मंदिर के पास कतार में लगे कांवरिये अफरातफरी मचाने लगते हैं. जल्दी जल चढ़ाने की होड़ में पुलिस के घेरे और अनुशासन को तोड़ डालते हैं और उस के बाद शुरू हुई धक्कामुक्की भगदड़ में बदल जाती है. देखते ही देखते ‘बोल बम’ का जयकारा चीखपुकार में बदल जाता है. हर ओर से रोने और चिल्लाने की आवाजें आने लगती हैं. शिव को जल चढ़ाने के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पैदल तय कर के देवघर पहुंचे अंधभक्ति में डूबे कांवरियों की जान तथाकथित ईश्वर शिव भी नहीं बचा सके. धर्म के नाम पर लगने वाले मजमों में भगदड़ मचना अब नई बात नहीं रह गई है. सरकार और प्रशासन के खासे बंदोबस्त के बावजूद भगदड़ मचती है और बेतहाशा मौतें होती हैं. ऐसी भगदड़ों के पीछे पोंगापंथियों का उपद्रव ही होता है. भीड़ में होने की वजह से वे किसी की सुनते नहीं और अपनी मनमानी करते हैं. हर साल सावन के महीने में बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज कसबे से कांवर ले कर लोग पैदल झारखंड में देवघर शहर के शिवमंदिर तक जाते हैं. सुल्तानगंज में गंगा नदी उत्तरवाहिनी है. सुल्तानगंज में अजगैबीनाथ मंदिर में पूजा क...

Զเधे_Զเधे

🎭गजब" "की" "बांसुरी" "बजती" "हैं" "वृन्दावन" "में" "कन्हैया" "की" "तारीफ" "करूँ" "मुरली" "की" "या" "मुरलीधर" "कन्हैया" "की" "जहाँ" "बस" "चलता" "न" "था" "तीरों" "और" "कमानों" "से" "वहां""जीत" "होती" "नटवर" "की" "मुरली" "के". "तानों". "से"🎭 •""*•«#Զเधे_Զเधे¸¸.•*¨*

जय श्री कृष्णा

होंठों में  बाँसुरिया  चेहरे पर  मुस्कान  है। दुःखो  से उबार दे ऐसा मेरा  श्याम  है।। जय श्री कृष्णा 

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट